अगर पर्दा न होता
तो ये पर्दा हटने का इंतजार न होता . . . .
इंतजार का ही खेल सारा
इंतजार न होता
तो आनंद न होता !
सुनो न !
तुम जब आना
थोड़े पर्दे में आना
रखना पर्दा.....,
अपने हसीन चेहरे पर
बातों के लहजे पर
हरकतों के हलचल पर।
सुनो !
तुम इसे कोई जबरन दिया हुवा आदेश मत समझना
एक गुजारिश समझना !
तुम्हें
किसी की नज़र न लगे
मेरी भी
इसलिए सबकी नजरों से बचना ।
अगर ये पर्दा न होता
तो पर्दा हटना का इंतेज़ार भी न होता
तुम हद से ज़्यादा ख़ूबसूरत न होते
मैं यूँ बेचैन न होता.........!
सदा
बचा कर रखना
थोड़ा सा पर्दा.......
ⒸⓇ इंतजार और पर्दा/अनुनाद/आनन्द/२५.०७.२०२६
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